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गर्भ ठहरने के लक्षण क्या होते है ? और कब दिखते है ?

र्भ ठहरने के लक्षण क्या होते है ?
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Written by Heerey Khan

गर्भ ठहरने के लक्षण क्या होते है ?: आज हम आपको कुछ ऐसे गर्भ ठहरने के लक्षण बता रहे है जो आमतोर पर गर्भवस्था के समय दीखते है , इस उम्र पर हर महिला को गर्भबती होने की चाह होती है | माँ बन्ने को बेसबरी से इन्तजार कर रही महिलाएं गर्भ ठहराने के लक्षण जानने के लिए काफी उत्सुक रहती है , लेकिन आपकी गर्भवस्था  की शुरुआत में गर्भ ठहराने के लक्षण दिखाई देने में कभी-कभी समय लगता है | पहले हफ्ते में कई बार गर्भबती महिलाओ को जानकारी ही नही हो पाती लेकिन यह जरुरी है कि उन लक्षणों को जाना जाए और उसी के मुताबिक , खान-पान किआ जाय | इन लक्षणों को नजरंदाज करने पर कई बार गभीरता का सामना करना पड़ता है |

र्भ ठहरने के लक्षण क्या होते है ?

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  1. गर्भवस्था के चलते हार्मोनल चेंज की बजह से पाचन प्रकिया भी प्रभाबित होती है , जिसकी बजह से कब्ज की समस्या होने लगती है |
  2. आमतौर पर महीना न आना या मांसिक घर्म में देरी को गर्भ ठहरने के लक्षण माना जाता है | हालाकि यह जरुरी नही है गर्भवस्थाकी बजह से ही मासिक धर्म  देरी हो, लेकिन फिर भी ज्यादातर महिलाओ में मासिक घर्म में देरी गर्भ ठहरने के लक्षण होते है | अंडे के गर्म की दीवर पर चिपकने के बाद हल्का रक्त निकलता है , जिसे कुछ लोग लेट पीरियड्स समझ लेते है | जबकि इसे spotting कहा जाता है प्रेंग्नेट होने का यह लक्षण गर्भवस्था के चौथे हप्ते में नजर आता है | अगर आपको स्पोटिंग हो रही है तो आप प्रेग्नेसी की पुष्टि  लिए गर्भवस्था की जांच भी करवायें |
  3. सामान्यता सभी महिलाओ में रेगुलर पीरियड साइकिल होता है | लेकिन प्रेग्नेंट होने के बाद पीरियड होना बंद हो जाता है | यदि आपको रेगुलर पीरियड मिस हो रहा है तो आप प्रेग्नेंट हो सकती है |
  4. प्रेग्नेसी प्लानिंग करने बाले कपल्स को गर्भवस्था शुरू होने से पहले किये गये सेक्स के बाद गर्भ ठहरने के लक्षण के रूप में हल्का ब्लीडिंग यानी स्पोटिंग नजर आती है | जब स्पर्म महिला के अंडे के साथ निषेचित होकर भूरड या निषेचित अंडा बनता है |तब करीब एक से दो हप्ते में बह गर्भबती के गर्भाशय से जुड़ जाता है , इससे गर्भबती को हलकी ब्लीडिंग होती है | यह लक्षण गर्भ ठहरने के पहले हप्ते से चौथे हप्ते के बीच दिखाई देता है | अगर आपको गर्भ ठहराने का यह लक्षण ना नजर आये तो परेशान न हो , हर गर्भबती महिला के साथ ऐसा होना जरुरी नही है |
  5. सुबह-सुबह आपको उलटी और कमजोरी का एहसास प्रेग्नेट होने के दुसरे सप्ताह में हो सकता है | लेकिन पहले यह निश्चित कर ली जियें कि ऐसा किसी बिमारी के कारण तो नही हो रहा है |
  6. अगर किसी महिला को इमली , नींबू, अचार जैसे खट्टे खाने की इच्छा हो रही है तो बह गर्भबती हो गई है | लेकिन तथ्य यह है कि गर्भधारण करने के बाद हार्मोन्स में परिबर्तन के कारण ऐसा हो सकता है|
  7. गर्भधारण करने के छठे सप्ताह के बाद बार-बार पेशाब लगती है | गर्भधारण के बाद कुछ हार्मोन्स में परिबर्तन होता है जिसके कारण खून का संचार बढ़ जाता है | जिसके कारण बार-बार पेशाब जाने की इच्छा करती है |
  8. प्रेंग्नेट होने के बाद स्तनों में बदलाब होने लगता है \ स्तनों में खून की आपूर्ति ज्यादा होने लगती है , इसके कारण स्तनों के आसपास झुनझुनी का एह्शास हो सकता है | निपल के हिस्से काले होने लगते है , इसे काला घेरा कहते है जो प्रेगनेंसी के बाद गहरे हो जाते है |
  9. जी मचलाना या जी घवराना प्रेग्नेसी के लक्षण है | डॉक्टर्स के अनुसार लगभग 65% से 80% गर्भबती महिलाएं जी घबराने और उल्टी की समस्या से प्रभाबित होती है | यह लक्षण प्रेग्नेसी के 4 से 6 हफ्तों में नजर आता है | इसका नाम मोरनिंग सिकनेस है, इसका मतलब यह बिलकुल नही कि आपको यह समस्या सुबह के समय ही होगी | मॉर्निंग सिकनेस गर्ब्ग्बती महिला को दिन के किसी भी समय हो सकती है | कुछ महिलाओ को दूसरी तिमाही की शुरुआत में जी घवराने या उल्टी की समस्या से निजात मिल जाती है , बही कुछ पूरी गर्भ्वास्ता के दौरान इससे परेशान रहती है |
  10. जितना ज्यादा हो सके प्रोटीन खाये , प्रोटीन बच्चे के बिकास में महत्वपूर्ण है,| आप चाहे तो दाल ,बीजे और दूध को अपनी डाइट का हिस्सा बनाकर बराबर मात्रा में प्रोटीन ले सकती है |

आवश्यक मार्गदर्शन 

  • गर्भवती महिला को हर चार घंटे में कुछ खाने की कोशिश करनी चाहिए | हो सकता है आपको भूख न लगी हो , परन्तु हो सकता है कि आपका शिशु भूखा हो,
  • बजन बड की चिंता करने के बजह अच्छी तरह से खाने की ओर ध्यान देना चाहियें ,|
  • कच्चा धूद न पिए .|
  • गर्भवती महिलाओ को गर्म मशालेदार चीजे नही खाना चाहिए .|
  • सम्पूर्ण गर्भवती  महिला का बजन 10 से 12 किलो बड़ना चाहिये |
  • गर्भवती महिला को उपवास नही रखना चाहये |
  • सब्जियों का सूप और जूस लेना चाहियें | भोजन के दौरान इनका सेवन करे | बाजार में मिलने बाले रेडिमेंट जूस व् सूज का उपयोग न करे |

इस बात से कोई इनकार नही कर सकता है कि गर्भावस्था वो समय है जब एक महिला को सबसे ज्यादा देखभाल और परहेज की जरूरत होती है , ये सच है कि गर्भावस्था में महिला जो कुछ खाती है और जिस तरह से रहती है , उसका सीधा असर उसके होने बाले बच्चे पर पड़ता है | पहले बच्चे के समय तो वैसे भी महिला काफी कंफ्यूज रहती है , वो यह तह करने में उलझी रहती है कि क्या सही होगा और क्या गलत ,|

हमें आशा है कि हमारी यह पोस्ट गर्भ ठहरने के लक्षण क्या होते है ? और कब दिखते है ? पसंद आई हो | अगर आप हमसे इस पोस्ट के बारे में कुछ पूछना चाहते हो तो comment box में जाकर comment करके पूछ सकते हो ,| अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के पास शेयर करना न भूले |

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