मोबाइल से बच्चों को कैसे रखें दूर

ByMamta Choudhary

Dec 18, 2022 , , , , , , , , , , , , , , ,
मोबाइल से बच्चों को कैसे रखें दूर

(कुछ ऐसी जानकारी जो बच्चों को हमेशा के लिए मोबाइल से दूर कर देगी)

मोबाइल को आज के टाइम में मनोरंजन का साधन मान लिया गया है उसी के इर्द-गिर्द बड़े हो या बच्चे अपनी दुनिया को देखते हैं आज के समय में पेरेंट्स वर्किंग होने की वजह से बच्चों को समय नहीं दे पाते हैं जिससे बच्चों की परवरिश पर असर पड़ता है तथा माता-पिता पर परवरिश से जुड़ी बहुत सी गलतियां कर बैठते हैं जब भी बच्चे रोते हैं या शैतानी करते हैं तो उनको मोबाइल फोन दे दिया जाता है वीडियो गेम्स चला दिया जाता है यह माता-पिता की तरफ से होने वाली सबसे बड़ी गलती होती है जिसको मां-बाप समय रहते नहीं समझ पाते लेकिन जब समझते हैं तो बहुत देर हो चुकी होती है और बच्चे के व्यवहार में बहुत ज्यादा परिवर्तन हो जाता है।

बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल ना दे

आज माता पिता सबसे बड़ी गलती यही करते हैं जब बच्चा बहुत शोर मचाता है बहुत ज्यादा शैतानी करता है या घर में कोई मेहमान आ जाए उस दौरान बच्चा माता पिता को परेशान करने से नहीं रुकता तो बच्चे को शांत करने के लिए पेरेंट्स इसको मोबाइल थमा देते हैं लेकिन माता पिता यह सबसे बड़ी गलती करते हैं बच्चे को लगने लगता है कि जब भी वह शोर मचाएगा, परेशान करेगा तो उसको मोबाइल दे दिया जाएगा और वह इसको अपनी आदत बना लेता है और फिर रोजाना ऐसे ही जिद करके मोबाइल लेता है इसलिए कभी भी बच्चा कैसी भी जिद कर रहा हो बच्चे को मोबाइल ना दें उसे किसी अन्य काम में व्यस्त करें या उसे कोई ऐसी जिम्मेदारी दे जिससे वह मोबाइल मांगना भूल जाए।

बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल ना दे
बच्चों को शांत रखने के लिए मोबाइल ना दे

बच्चों को मोबाइल देने से उनके स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है

बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बहुत सी स्टडी करी गई है उनके व्यवहार को लेकर बहुत सी स्टडी करी गई है उनसे पता चलता है कि बच्चों का बहुत ज्यादा फोन देखना, लगातार स्क्रीन पर नजरें टिकाना उनको मानसिक रोगी बना सकता है यह बच्चों के व्यवहार को काफी प्रभावित करता है ऐसे बच्चे जो बहुत ज्यादा टाइम मोबाइल देखते हैं वह छोटी-छोटी बातों पर अपना आपा खो देते हैं तथा एक दम से आक्रामक हो जाते हैं उनके स्वास्थ्य पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है इसलिए उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए तथा उनकी मानसिक हालत अच्छी रहे इसलिए आप उसको मोबाइल से दूर रखें।

क्या मोबाइल का लड़कों पर असर ज्यादा होता है

बच्चों के व्यवहार पर बहुत अध्ययन किए गए हैं इन अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि लड़के और लड़कियां दोनों के व्यवहार में बहुत फर्क होता है लड़के मोबाइल से ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं बहुत से अध्ययनों के बाद यह सामने आया कि 3 से 5 साल की उम्र के बच्चों को शांत करने के लिए स्मार्टफोन और टेबलेट जैसे उपकरणों का बार-बार उपयोग लड़कों को आक्रामक व चिडचिड़ा बनाता है तथा यह भावनात्मक विकृति से जुड़ा मामला बन जाता है ।

मोबाइल की वजह से हिंसक प्रवृत्ति

जब बच्चे ज्यादा देर तक फोन को देखते हैं तो उनका दूसरों के प्रति रिएक्शन खराब होने लगता है जिससे उनमें उदासी और उत्तेजना बढ़ती है तथा बच्चों में मूड स्विंग भी होने लगता है यह बड़ा चुनौतीपूर्ण हो जाता है जब बच्चों को ऐसा करते हुए देखते हैं इसलिए यह सबसे सही होगा कि आप बच्चों को इन डिवाइस से बिल्कुल दूर कर लें तथा उनको उनका मासूम जीवन जीने दे आप उनको समय दें जिससे बच्चे ऐसी चीजों की जिद ही ना करें उनको व्यस्त रखें।

मोबाइल देखने की वजह से बच्चों का व्यवहार नकारात्मक हो जाता है तथा कोई भी चुनौती यदि उनके सामने आती है तो बच्चों का रिएक्शन बहुत ही खराब होता है उनका अन्य किसी काम में दिल नहीं लगता बच्चे बात बात पर गुस्सा होने लगते हैं तथा कई बार तो ऐसा भी देखा गया है कि बच्चे बड़ा हिंसक व्यवहार करते हैं अभी हाल ही में एक न्यूज़ आई थी कि कैसे बच्चे ने मोबाइल ना मिलने के कारण पूरे घर को तहस-नहस कर दिया था और माता-पिता कुछ भी नहीं कर सके उनको बाहर से पुलिस बुलानी पड़ी यह बहुत ही दुखद बात है कि आज की जनरेशन को आप किस दिशा की ओर ले जा रहे हैं इस बात पर सभी माता-पिता ध्यान दें क्योंकि उनके बच्चे आगे जाकर उनका ही भविष्य बनेंगे अतः आज से ही मोबाइल पर रोक लगाएं यह आपका दायित्व बनता है।

बच्चों को मोबाइल से दूर कैसे करें

अगर आप अपने बच्चों से मोबाइल की लत छुड़वाना चाहते हैं तो कुछ तरीके हैं जिनको आजमा कर आप यह लत छुड़वाने की कोशिश कर सकते हैं जिससे आपका बच्चा मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होगा और आप उसको एक अच्छी दिशा दे सकेंगे और वह एक अच्छा नागरिक बनेगा।

  • माता-पिता को चाहिए कि वह बच्चे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं और उसकी देखभाल करें उसको एहसास दिलाएं कि आप उसके लिए हर वक्त तैयार हैं आपके पास उसके लिए समय ही समय है।
  • बच्चे को क्रिएटिव क्लासेज में भेजें जैसे डांस पेंटिंग म्यूजिक आदि।
  • आप अपने बच्चे को किसी भी एक स्पोर्ट्स में जरूर डालें जिससे उसका मानसिक व शारीरिक विकास होगा तथा वह मोबाइल जैसी चीजों से दूर रहेगा।
  • उसको घर के कार्य में सहयोग करने के लिए कहे तथा उसे कुछ जिम्मेदारियां दे जो उसकी क्षमता के अनुरूप है जिससे उसका दिमाग अच्छे काम की और जागरूक होगा और वह फोन देखने की सोचेगा भी नहीं।
  • बच्चों से पौधे लगवाए उनको प्रकृति के प्रति प्रेम करना सिखाए बच्चों से पौधों की देखभाल करने को कहें उनको यह जिम्मेदारी दें इससे बच्चा व्यस्त रहेगा और उसकी आदतों में सुधार होगा।
  • बच्चे को आप पालतू लाकर दे जिसका वह ध्यान रखें जिससे उसमें इमोशंस पैदा होंगे दयालुता की भावना विकसित होगी और वह आक्रामक व्यवहार कभी भी नहीं करेगा सदा खुश रहेगा।
  • सभी माता-पिता की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने बच्चे के सामने मोबाइल ना देखें क्योंकि माता-पिता को फोन पर जब बच्चे देखते हैं तो उनको लगता है कि यही एकमात्र मनोरंजन का साधन है और वह उसको अहमियत देने लगता है उसको लगता है कि इसी से ही मनोरंजन किया जा सकता है और वह भी उस पर ज्यादा वक्त बिताता है इसलिए माता-पिता मोबाइल से दूरी बनाए जिससे बच्चा भी देखकर सीखेगा।
  • इतनी सारी कोशिश करने के बाद भी यदि आपका बच्चा नहीं मानता है बहुत ज्यादा जिद्दी हो चुका है तो आप मोबाइल पर गूगल प्ले स्टोर पर जाकर क्रैक्ड स्क्रीन प्रैंक के ऐप को डाउनलोड कर दें इससे जब भी बच्चा फोन देखेगा तो उसको स्क्रीन क्रैक नजर आएगी और वह धीरे-धीरे फोन से दूर हो जाएगा।
बच्चों को मोबाइल से दूर कैसे करें
बच्चों को मोबाइल से दूर कैसे करें

मोबाइल देखने से बच्चों को क्या नुकसान होते हैं

  • फोन देखने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ता है बच्चों की आंखें नाजुक होती हैं जिससे वह खराब हो सकती हैं फोन से निकलती हुई नीली रोशनी आंखों पर बहुत असर डालती है।
  • बच्चों के दिमाग पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है बच्चे उदास रहने लगते है तथा जो फोन पर चल रहा है उसी को ही हकीकत मानते है फेंटेसी दुनिया में रहने लगते है।
  • बच्चे के व्यवहार पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है वह चिड़चिड़ा हो जाता है आक्रामक हो जाता है किसी की भी नहीं सुनता।
  • बच्चे की पढ़ाई पर बहुत बुरा असर पड़ता है वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगाता जिससे वह अच्छी परफॉर्मेंस नहीं कर पाता।
  • फोन देखने की वजह से नींद पर बहुत बड़ा असर पड़ता है नींद ठीक तरीके से नहीं आ पाती और नींद नहीं आने की वजह से चिड़चिड़ाहट बढ़ती है ।
  • बच्चे के सिर में दर्द रहने लगता है।

आपको क्या नहीं करना चाहिए

  • कई बार माता-पिता कोई भी काम कराने के लिए बच्चे को लालच देते हैं और कहते हैं कि यदि यह काम कर दिया तो उसको फोन दिया जाएगा जिस के लालच में आकर बच्चा वह काम कर देता है लेकिन जब फोन नहीं मिलता तो वह आक्रामक हो जाता है इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वह कभी भी बच्चे को फोन का लालच ना दें यह सबसे गलत है काम उसको मोटिवेट करके करवाएं लालच देकर यदि काम करवाएंगे तो वह जिंदगी में कभी भी बिना लालच के काम नहीं कर पाएगा।
  • यदि बच्चा अधिक मोबाइल देखता है तो आप उसकी पिटाई ना करें यह बहुत गलत होगा यह उसके बाल मन पर हमेशा के लिए छप जाएगा और वह चोरी-छिपे फोन देखने की कोशिश करेगा जो कि गलत होगा यदि आपको अपने बच्चे की अच्छी परवरिश करनी है तो उसे पीटे नहीं।

निष्कर्ष

यदि आप अपने बच्चे को सौम्य और शांत बनाना चाहते हैं तो उसको मोबाइल बिल्कुल भी ना दें यदि बच्चा अधिक मोबाइल देखेगा तो उसके दिमाग पर असर पड़ सकता है वह हिंसक प्रवृत्ति का बन सकता है इसलिए सही समय पर माता-पिता एक अच्छा कदम उठाएं जो आपके बच्चे की भलाई के लिए हो उसको समय दें उसके साथ प्यार का व्यवहार करें और उसकी दिनचर्या को व्यस्त बनाएं।

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Q.1 बच्चा मोबाइल मांगे तो क्या करें?

यदि बच्चा मोबाइल मांगे तो आप उसको किसी काम में व्यस्त कर दें आप उसे ऐसी जिम्मेदारी दें जिसमें उसका मन लगे और फिर काम पूरा होने पर आप उसको प्यार करें तथा शाबाशी दे लेकिन उसको किसी भी हालत में मोबाइल ना दें यह आपकी जिम्मेदारी बनती है

Q.2 क्या बच्चे जब फोन पर हो तो निगरानी करनी चाहिए

जब भी आपके बच्चे फोन पर हो और किसी जरूरी काम के लिए फोन को लिया है तो भी आप निगरानी रखें क्योंकि यह आपकी जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है कि बच्चा क्या देख रहा है या किसके साथ बात कर रहा है यह आपको पता होना जरूरी है क्योंकि आजकल फोन पर ऐसे कंटेंट भी होते हैं जो बच्चों के देखने लायक नहीं होते इसलिए आप अपनी जिम्मेदारी निभाएं

Q.3 मोबाइल चलाने से कौन सी बीमारी हो सकती है

मोबाइल चलाने से अनिद्रा की शिकायत हो जाती है तथा तनाव व सिर में दर्द रहने लगता है स्क्रीन पर लगातार नजर रखने की वजह से आंखों में भी शिकायत हो जाती है तथा मानसिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ता है

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